स्वराज संवाद

पारंपरिक ज्ञान का समावेश करके जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन क्षमता का सुदृढ़ीकरण

7, 8, और 9 जनवरी 2025 | इंडिया हैबिटेट सेंटर, लोधी रोड, नई दिल्ली

स्वराज संवाद समुदाय के स्वराज को बढ़ावा दिए जाने के उद्देश्य से विविध हितधारकों और विभिन्न क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साथ एक मंच पर लाने का प्रयास है। आदिवासी समुदायों की जलवायु अनुकूल प्रथाएं, खाद्य सुरक्षा, खेती और ऊर्जा से सम्बंधित विभिन्न चुनौतियों के स्थानीय समाधान निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं । यह राष्ट्रीय सम्मेलन इन पारम्परिक प्रथाओं को व्यापक रूप से बढ़ावा देने एवं राष्ट्रीय रणनीतियों में शामिल करने का प्रयास करेगा । 

गहन चर्चाओं और सार्थक संवादों के माध्यम से, इस सम्मेलन में आदिवासी स्वराज और जलवायु सहनशीलता से जुड़ी जटिलताओं का विश्लेषण करेंगे, रणनीतिक साझेदारी की दिशा की पहचान करेंगे, और स्वदेशी ज्ञान को जलवायु अनुकूल योजनाओं में शामिल करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां विकसित करेंगे । इस सम्मलेन का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना है ताकि सामूहिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जा सके, आदिवासी समुदायों को अपने समाधान विकसित करने में सक्षम बनाया जा सके, और ऐसा नागरिक समाज संगठन (CSO) सहयोग स्थापित किया जा सके जो खाद्य, खेती, ऊर्जा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में आदिवासी आकांक्षाओं का समर्थन करे।

मुख्य उद्देश्य

आदिवासी समाधान और आकांक्षाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सहयोगात्मक संवाद, ज्ञान आदान-प्रदान, और कार्यवाही को बढ़ावा देने का प्रयास करना

आदिवासी समुदायों की जलवायु-अनुकूल प्रथाओं पर चर्चा करने के लिए विभिन्न हितधारकों के लिए एक मंच प्रदान करना, जो भौगोलिक अलगाव, सेवाओं की सीमित पहुंच, और पारंपरिक जीवनशैली पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करे। साझेदारियों को बढ़ावा दें ताकि ऐसे रणनीतियों का सह-निर्माण किया जा सके जो आदिवासी स्वराज को बढ़ावा दें और यह सुनिश्चित करें कि आदिवासी दृष्टिकोण जलवायु नीति और सभी स्तरों पर निर्णय-प्रक्रिया में सम्मिलित हों।

क्षेत्रीय आकांक्षाओं को चिन्हित करें और 2030 के लिए एक एजेंडा परिभाषित करना

भारत के विभिन्न क्षेत्रों की आदिवासी समुदायों की आकांक्षाओं और विषयों को सहयोगात्मक रूप से चिन्हित करें, जिससे 'एजेंडा 2030' में योगदान देने वाला एक चार्टर तैयार हो। यह चार्टर समुदाय-नेतृत्वित समाधानों को दिशा देगा और सुनिश्चित करेगा कि उनकी प्राथमिकताएं और प्रथाएं भारत की जलवायु कार्रवाई को आकार देने के केंद्र में हों।

राष्ट्रीय रणनीतियों में पारंपरिक ज्ञान का समावेश करना

ऐसी कार्यान्वयन योग्य रणनीतियाँ विकसित करना, जो पारंपरिक आदिवासी प्रथाओं और ज्ञान को राष्ट्रीय जलवायु अनुकूलन योजनाओं में शामिल करें। यह सुनिश्चित करें कि आधुनिक चुनौतियों का समाधान करने में आदिवासी ज्ञान को पहचान और महत्व दिया जाए।

स्वराज के साथ नागरिक समाज संगठन (CSO) की सहभागिता

आदिवासी समुदायों के स्वराज को बढ़ावा देने के लिए उनके समाधान और प्राथमिकताओं को भारत की जलवायु रणनीतियों और कार्य योजनाओं में शामिल करते हुए एक नागरिक समाज संगठन (CSO) की सहभागिता प्रारम्भ कर और उसके सुदृढ़ीकरण के लिए चर्चा।

Vaagdhara-logo
climaterise-logo